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संगठनात्मक ढाचें


01 मई, 1976 में नई दिल्ली में हुए मुख्य सचिवों के सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि राज्यों में प्रशासनिक सुधार विभाग की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण किया जाय ताकि मुख्यालय, विभागाध्यक्षों. क्षेत्रीय एवं फील्ड स्तर के कार्यालयों की कार्य प्रणाली का गहन अध्ययन किया जा सके और प्रशासन में सुधार एवं गतिशीलता लाने के उद्देश्य से अधिकारों के प्रतिनिधायन, कार्य पद्धति में सरलता लाने, प्रारूप एवं विवरणियों के अभिनवीकरण तथा सरलीकरण, रिकार्ड्स मैनेजमेंट, जनता की शिकायतों का शीघ्र निवारण तथा नई-नई कार्य प्रणालियों के लागू किये जाने आदि महत्वपूर्ण विषय पर कार्य किये जाने की दशा में शोध कार्य करके सुधारात्मक कदम उठाये जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु प्रशासनिक सुधार विभाग के अन्तर्गत सचिवालय स्तर पर वर्ष 1978 में प्रशासनिक सुधार निदेशालय का गठन हुआ। प्रशासनिक सुधार निदेशालय ही मात्र राज्य सरकार की एक ऐसी अधिकृत संस्था है जो कार्यभार के आधार पर कार्यालय/विभाग की उपयोगिता/अनुपयोगिता के सम्बन्ध में परामर्श देती हैं। इसके अतिरिक्त सचिवालय स्तर पर विलम्ब की रोकथाम, अनुभागों की संख्या में कमी/बढ़ोत्तरी, नई-नई कार्य प्रणालियों को लागू करने हेतु भी सुझाव/परामर्श दिया जाता हैं।

वर्तमान में प्रशासनिक सुधार निदेशालय का संगठनात्मक ढांचा निम्नानुसार है:-

क्र0 सं0 पदनाम वेतनमान स्वीकृत पद भरे पद
1. निदेशक विभाग के प्रमुख सचिव /सचिव/विशेष सचिव पदेन निदेशक होते हैं।
2. संयुक्त निदेशक रू0 15,600-39,100 01 01
3. वरिष्ठ शोध अधिकारी रू0 15,600-39,100 03 03
4. शोध अधिकारी रू0 15,600-39,100 06 00
5. आशुलिपिक रू0 9,300-34,800 03 02
6. टंकक रू0 5,200-20,200 02 01
7. वाहन चालक रू0 5,200-20,200 02 01
8. अनुसेवक रू0 5,200-20,200 04 02
  योग   21 10